
विवाह से जुड़ी चर्चाओं में “मांगलिक दोष” शब्द अक्सर सुनने को मिलता है, लेकिन बहुत कम लोग इसे सही तरीके से समझते हैं। जब कुंडली में मंगल ग्रह पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में स्थित होता है, तो इसे मांगलिक दोष कहा जाता है। माना जाता है कि यह स्थिति वैवाहिक जीवन में तनाव, देरी या मतभेद ला सकती है।
लेकिन घबराने की जरूरत नहीं — मांगलिक दोष का मतलब यह नहीं कि विवाह में समस्या निश्चित है। इसकी तीव्रता मंगल की राशि, भाव और अन्य ग्रहों की दृष्टि पर निर्भर करती है। कई बार गुरु या शुक्र की शुभ दृष्टि इस दोष के प्रभाव को काफी हद तक कम कर देती है।
पारंपरिक ज्योतिष में मांगलिक दोष के कुछ प्रभावी उपाय बताए गए हैं — जैसे मंगल से संबंधित मंत्र जाप, हनुमान जी की उपासना, या कुछ मामलों में “कुंभ विवाह” जैसी परंपरा। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण है सही विश्लेषण — क्योंकि हर मांगलिक दोष एक जैसा नहीं होता।
विवाह से पहले कुंडली मिलान करवाते समय, दोनों की कुंडली में मांगलिक दोष की स्थिति और उसकी वास्तविक तीव्रता जांचना जरूरी है। सतही जानकारी के आधार पर निर्णय लेने की बजाय, विस्तृत विश्लेषण से ही सही तस्वीर सामने आती है।
???? शुभमार्ग – सही दिशा, सही भविष्य।