शुभमार्ग

ऑनलाइन परामर्श उपलब्ध — अभी संपर्क करें
✓ 100% Trusted कम सेवा शुल्क में अच्छी और सटीक जानकारी प्रदान करते हैं

विवाह के लिए कुंडली मिलान

  1. अष्टकूट गुण मिलान — वैदिक ज्योतिष में सबसे प्रचलित विधि, जिसमें कुल 36 गुणों का मिलान किया जाता है। सुखद विवाह के लिए कम से कम 18 गुणों का मिलना आवश्यक माना जाता है। इसमें 8 कूट होते हैं: वर्ण (1 अंक) — कार्य क्षमता और बौद्धिक स्तर; वश्य (2 अंक) — आकर्षण और समर्पण; तारा (3 अंक) — स्वास्थ्य, भाग्य और आयु; योनि (4 अंक) — शारीरिक अनुकूलता और अंतरंगता; ग्रह मैत्री (5 अंक) — मानसिक अनुकूलता और मित्रता; गण (6 अंक) — स्वभाव और व्यवहार; भकूट (7 अंक) — प्रेम, आर्थिक समृद्धि और पारिवारिक सुख; नाड़ी (8 अंक, सबसे महत्वपूर्ण) — आनुवंशिक अनुकूलता, स्वास्थ्य और संतान सुख।
  2. मांगलिक दोष विचार
  3. सप्तम भाव और सप्तमेश — सप्तम भाव विवाह और जीवनसाथी का कारक होता है; सप्तम भाव में स्थित ग्रह, सप्तमेश की स्थिति और उन पर पड़ने वाली शुभ-पापी दृष्टि वैवाहिक जीवन की स्थिरता तय करती है। शुक्र (पुरुषों के लिए) और गुरु (महिलाओं के लिए) की स्थिति भी जांची जाती है।
  4. नवमांश कुंडली — विवाह की वास्तविक नींव, जीवनसाथी के आंतरिक स्वभाव और विवाह के बाद के भाग्य को दर्शाती है।
  5. आयु और स्वास्थ्य — लग्न, लग्नेश, अष्टम भाव और अष्टमेश की स्थिति देखकर आयु का संतुलन जांचा जाता है।
  6. संतान सुख — पंचम भाव, पंचमेश और गुरु की स्थिति का विश्लेषण; सप्तांश कुंडली का भी अध्ययन।
  7. आर्थिक स्थिति और कुटुंब — द्वितीय भाव (कुटुंब व संचित धन), एकादश भाव (आय) और दशम भाव (करियर) का मिलान।
  8. दशा और गोचर — विवाह के समय और बाद चलने वाली विंशोत्तरी महादशा-अंतर्दशा का विश्लेषण, ताकि किसी मारक या क्रूर ग्रह की दशा से पहले ही उपाय किया जा सके।